कहा- अपना मेयर बनने के बाद नगर निगम का वित्तीय संकट दूर हो जाने का दावा करने वाली भाजपा अब लोगों की जेब पर बोझ डालने का प्रयास कर रही
CHANDIGARH, 26 FEBRUARY: चंडीगढ़ प्रदेश कांग्रेस ने चंडीगढ़ में संपत्ति कर (प्रॉपर्टी टैक्स) में भारी वृद्धि की गुपचुप तैयारी पर कड़ी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि यह तैयारी चंडीगढ़ प्रशासन और भाजपा की गुप्त मिलीभगत से की गई है।
चंडीगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एचएस लक्की ने एक बयान जारी कर कहा कि भाजपा ने शुरू में नगर निगम सदन की बैठक में संपत्ति कर की दरों में मौजूदा 3% से 12% तक की अत्यधिक वृद्धि का प्रस्ताव रखा था लेकिन कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्षदों के कड़े विरोध के बाद इस प्रस्ताव को वापस ले लिया गया। लक्की ने भाजपा पर सीवरेज उपकर बढ़ाने के लिए भी इसी तरह की रणनीति अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि इसे भी विपक्षी पार्षदों की सतर्कता और संख्यात्मक ताकत के कारण विफल कर दिया गया। उन्होंने महापौर के चुनाव के बाद नकदी की कमी से जूझ रहे नगर निगम के लिए अतिरिक्त धन जुटाने के अपने वायदे को पूरा करने में विफल रहने के लिए भाजपा की आलोचना की और कहा कि भाजपा ने कहा था कि एक बार हमारा मेयर बन गया तो हम पैसे की कमी नहीं रहने देंगे लेकिन अब भाजपा केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता मांगने के बजाय चंडीगढ़ के निवासियों पर अनुचित वित्तीय बोझ डालने का प्रयास कर रही है।
लक्की ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ऐसे किसी भी कदम का दृढ़ता से विरोध करती है और भाजपा के छिपे हुए एजेंडे को उजागर करने के लिए प्रतिबद्ध है। लक्की ने जोर देकर कहा कि चंडीगढ़ के लोग भाजपा की भ्रामक चालों से अच्छी तरह वाकिफ हैं और गुमराह नहीं होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की कोई भी कार्रवाई उल्टी पड़ेगी, जिसके परिणामस्वरूप दिसंबर 2026 में होने वाले नगर निगम चुनावों में भाजपा के लिए गंभीर नतीजे होंगे।
लक्की ने यह भी कहा कि तीसरे और चौथे दिल्ली वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार चंडीगढ़ प्रशासन से नगर निगम का उचित वित्तीय हिस्सा सुरक्षित करने के लिए अगर नवनिर्वाचित महापौर प्रयास करती हैं तो कांग्रेस पार्टी इसका समर्थन करेगी। लक्की ने यह भी याद किया कि कैसे चंडीगढ़ कांग्रेस ने बिजली विभाग के निजीकरण का पुरजोर विरोध किया था लेकिन यह कदम आखिरकार चंडीगढ़ प्रशासन ने लागू किया और भाजपा मूकदर्शक बनी रही। उन्होंने चेतावनी दी कि इस निजीकरण के परिणाम जल्द ही निवासियों को महसूस होंगे, क्योंकि बिजली की बढ़ती लागत उन्हें भारी वित्तीय बोझ उठाने के लिए मजबूर करेगी।

