डॉ. शास्त्री के नेतृत्व में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ चंडीगढ़ के प्रतिनिधिमंडल ने अतिरिक्त उपायुक्त अमनदीप सिंह भट्टी को सौंपा प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन
CHANDIGARH, 18 JUNE (ANewsoffice): वर्ष-2010 से पूर्व विधिवत रूप से नियुक्त देशभर के लाखों शिक्षकों के सेवा हितों, वरिष्ठता और भविष्य की सुरक्षा को लेकर आज अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ चंडीगढ़ के एक प्रतिनिधिमंडल ने चंडीगढ़ जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी एवं अतिरिक्त उपायुक्त अमनदीप सिंह भट्टी से मुलाकात की। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ चंडीगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र शास्त्री के नेतृत्व में मिले इस प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के नाम एक ज्ञापन अतिरिक्त उपायुक्त को सौंपा। इस अवसर पर डॉ. धर्मेंद्र शास्त्री के साथ संगठन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. राजकुमार शांडिल्य, उपाध्यक्ष डॉ. शंकर मोहन वशिष्ठ, महिला सह प्रमुख सुधा मेहता, वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य सुखविंदर सिंह, प्रदीप सूद सहित कई अन्य वरिष्ठ शिक्षक विशेष रूप से उपस्थित रहे।
अतिरिक्त उपायुक्त से मुलाकात के दौरान डॉ. धर्मेंद्र शास्त्री ने कहा कि 23 अगस्त 2010 को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) द्वारा जारी शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) संबंधी अधिसूचना और उसके संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 29 मई 2026 को दिए गए निर्णय से देशभर के शिक्षकों में गहरी चिंता, पीड़ा और असुरक्षा की भावना व्याप्त हो गई है। इस निर्णय से वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त उन शिक्षकों के सेवा हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है, जिन्होंने दशकों तक राष्ट्र निर्माण और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में अपना जीवन खपा दिया। ज्ञापन में विधिक और प्रशासनिक सिद्धांतों का हवाला देते हुए कहा गया है कि कोई भी नियम या नीति सामान्यतः उसके लागू होने की तिथि से प्रभावी होती है। पूर्व में वैध रूप से नियुक्त शिक्षकों पर बाद में बने पात्रता मानदंडों को पूर्व प्रभाव (Retrospective Effect) से लागू करना प्राकृतिक न्याय और समानता के सिद्धांतों के पूरी तरह विपरीत है। 2010 से पहले नियुक्त ये सभी शिक्षक तत्कालीन नियमों और योग्यताओं के अनुसार पूरी तरह वैध रूप से चयनित हुए थे।
प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका के निर्णय का वे पूरा सम्मान करते हैं लेकिन जनहित और शिक्षक हित में आवश्यक नीतिगत व विधायी समाधान निकालने का अधिकार देश की संसद और सरकार के पास सुरक्षित है। ज्ञापन में मांग की गई है कि 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता से स्थायी रूप से मुक्त किया जाए। ऐसे शिक्षकों की सेवा, वरिष्ठता, पदोन्नति एवं अन्य सभी वैधानिक सेवा लाभों को पूर्ण नीतिगत संरक्षण प्रदान किया जाए। यदि आवश्यकता हो तो संसद में उपयुक्त विधायी संशोधन अथवा विशेष प्रावधान लाकर इस वर्ग को स्थायी रूप से राहत दी जाए। इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि शिक्षकों में व्याप्त असमंजस और डर का माहौल तत्काल समाप्त हो सके। इस मौके पर अतिरिक्त उपायुक्त अमनदीप सिंह भट्टी ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को बेहद ध्यानपूर्वक सुना और शिक्षकों की चिंताओं को जायज बताते हुए आश्वस्त किया कि इस ज्ञापन को उचित माध्यम से तुरंत प्रधानमंत्री कार्यालय और शिक्षा मंत्रालय तक पहुंचाया जाएगा। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ चंडीगढ़ के पदाधिकारियों ने विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले शिक्षक समुदाय के साथ भारत सरकार पूरी संवेदनशीलता और दूरदर्शिता के साथ न्याय सुनिश्चित करेगी।

