बोले- यहां न घर, न बाजार और न ग्राहक, ऐसे कैसे चलेगा रोजगार, अब नगर निगम हाउस की बैठक में उठेगा वेंडरों का मुद्दा
CHANDIGARH, 16 SEPTEMBER (ANewsoffice): सेक्टर-52 एवं 53 के लिए निर्धारित स्ट्रीट वेंडिंग जोन को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों का संज्ञान लेते हुए चंडीगढ़ के मेयर सौरभ जोशी ने आज अचानक ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर साइट का निरीक्षण किया। इस दौरान उनके साथ संयुक्त आयुक्त डॉ. हिमांशु गुप्ता भी मौजूद रहे। इस दौरान सामने आया कि निर्धारित वेंडिंग जोन के आसपास न तो कोई पर्याप्त रिहायशी आबादी है, न व्यावसायिक गतिविधि और न ही ग्राहकों की आवाजाही।
क्षेत्र का बड़ा हिस्सा फिलहाल खाली एवं जंगलनुमा है, जिसके कारण यहां दुकान लगाकर वेंडरों के लिए अपना रोजगार चलाना व्यावहारिक रूप से बेहद कठिन है। मेयर सौरभ जोशी ने कहा कि केवल कागजों पर किसी जगह को वेंडिंग जोन घोषित कर देना पर्याप्त नहीं है। वेंडिंग जोन का उद्देश्य तभी पूरा होगा म, जब वहां वेंडर अपनी रोजी-रोटी कमा सकें। उन्होंने कहा कि जहां न घर हैं, न बाजार और न ग्राहक, वहां वेंडर अपना परिवार कैसे चलाएगा ? वेंडिंग जोन की योजना ग्राउंड रियलिटी और वेंडरों की आजीविका को ध्यान में रखकर बननी चाहिए। मेयर जोशी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सेक्टर 52-53 की मौजूदा व्यवस्था का नए सिरे से व्यावहारिक आंकलन किया जाए तथा ऐसे वैकल्पिक स्थान तलाशे जाएं, जहां पर्याप्त आवागमन हो और वेंडर सम्मानपूर्वक अपना रोजगार चला सकें।
मेयर ने यह भी कहा कि स्थायी समाधान होने तक प्रभावित वेंडरों के लिए व्यावहारिक अंतरिम व्यवस्था के विकल्पों पर भी विचार किया जाए। इस मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए मेयर सौरभ जोशी ने कहा कि सेक्टर 52-53 के स्ट्रीट वेंडिंग जोन का मामला नगर निगम की आगामी जनरल हाउस मीटिंग में उठाया जाएगा, ताकि सदन में इस पर विस्तृत चर्चा कर उचित और टिकाऊ समाधान निकाला जा सके। मेयर सौरभ जोशी ने कहा कि वेंडरों की शिकायतें वास्तविक हैं। उनका रोजगार किसी अव्यावहारिक योजना की भेंट नहीं चढ़ना चाहिए। स्ट्रीट वेंडिंग जोन की व्यवस्था में वेंडरों की आजीविका, स्वच्छता, यातायात, सार्वजनिक सुविधा और व्यवस्थित शहरी प्रबंधन समेत सभी पहलुओं के बीच संतुलन आवश्यक है।

