पंजाब में गदरी देशभक्तों और बब्बर अकालियों की स्मृति में एक विश्वविद्यालय बनाया जाए : साहिब थिंड

CHANDIGARH, 24 JAN: गदरी देशभक्तों और बब्बर अकालियों की स्मृति में एक विश्वविद्यालय स्थापित किया जाए। ये मांग प्रो. मोहन सिंह मेमोरियल फाउंडेशन (कनाडा) के संस्थापक साहिब थिंड ने आज यहां चंडीगढ़ में एक प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुए की। उन्होंने बताया कि इस बाबत उन्होंने पंजाब सरकार को एक पत्र भी लिखा है। 

थिंड ने बताया कि प्रो. मोहन सिंह मेमोरियल फाउंडेशन (कनाडा) तीन दशकों से अधिक समय से देशभक्तों की विरासत, पंजाबी संस्कृति और मातृभाषा को संरक्षित करने के लिए समर्पित है। यह संगठन उत्तरी अमेरिका, यूरोप और दक्षिण एशिया सहित कई देशों में सक्रिय है। संस्था द्वारा पिछले 30 वर्षों से गदर आंदोलन, बब्बर अकाली आंदोलन और स्वतंत्रता संग्राम के योद्धाओं की याद में सरे (बीसी, कनाडा) में प्रतिवर्ष गदरी बाबाओं की याद में मेला लगाया जाता है। 

उन्होंने कहा कि यह संस्था ब्रिटिश साम्राज्य द्वारा किये जा रहे अन्याय के विरुद्ध न्याय पाने के लिए निरन्तर संघर्ष कर रही है। उन्होंने पंजाब की महान क्रान्तिकारी एवं बलिदानी ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण के लिए पंजाब सरकार से मांगे करते हुए कहा कि गदरी देशभक्तों और बब्बर अकालियों की स्मृति में एक विश्वविद्यालय बनना चाहिए, ग़दर आन्दोलन, बब्बर अकाली आन्दोलन, कीर्ति आन्दोलन और स्वतंत्रता संग्राम को समर्पित आन्दोलनों के इतिहास को विद्यालयों और महाविद्यालयों में एक अलग और विशेष विषय के रूप में पढ़ाया जाना चाहिए, शहरों, सड़कों, चौराहों और अन्य संस्थानों के नाम जो अंग्रेजी शासन के दौरान ब्रिटिश अधिकारियों के नाम पर रखे गए थे, और जो अभी भी अस्तित्व में हैं, उन्हें तुरंत स्वतंत्रता धारकों के नाम में बदल दिया जाना चाहिए। इसके अलावा स्वतन्त्रता आन्दोलन के क्रान्तिकारियों के गाँवों, नगरों तथा नगरों में विद्यालयों, सड़कों तथा अन्य सार्वजनिक स्थलों का नाम संबंधित देशभक्तों के नाम पर रखा जाए। गदर आंदोलन, बब्बर अकाली और स्वतंत्रता संग्राम के देशभक्तों और शहीदों के घरों, गलियों या इमारतों को पंजाब सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्मारकों के रूप में बनाए रखा जाना चाहिए।

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