तीसरे ट्रायल में भी कोवैक्सीन पासः ये कोरोना वायरस के यूके वेरियंट पर भी है प्रभावी, जानिए विपक्ष ने क्या उठाए थे सवाल

NEW DELHI: देश में कोरोना को हराने के लिए वैक्सीनेशन के तहत लोगों को कोविशील्ड और भारत बायोटेक की स्वदेशी कोवैक्सीन दी जा रही है। देश में कोरोना की स्थिति को देखते हुए वैक्सीन के शुरुआती ट्रायल के नतीजों के आधार पर इसे मंजूरी दी गई थी। इस वैक्सीन के अब तीसरे क्लीनिकल ट्रायल के परिणाम भी सामने आ गए हैं, जिनमें पाया गया है कि कोवैक्सीन कोरोना वायरस के खिलाफ 81 प्रतिशत तक प्रभावी है। यही नहीं, कोवैक्सीन कोरोना वायरस के यूके वेरियंट पर भी पूरी तरह असरकारक है।

भारत बायोटेक और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की ओर से विकसित की गई इस वैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल के नतीजे के अनुसार यह न केवल 81 प्रतिशत प्रभावी है, बल्कि वायरस के यूके वेरियंट पर भी प्रभावी है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी यही कोवैक्सीन की दी गई है।

विपक्षी नेताओं ने कोवैक्सीन पर उठाए थे ये सवाल

• वैक्सीन के प्रति भरोसा पैदा करने के लिए सबसे पहले यह वैक्सीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लगवानी चाहिए: मनीष तिवारी, कांग्रेस पार्टी

• कोवैक्सीन का तीसरे चरण का ट्रायल अभी तक पूरा भी नहीं हुआ है और सरकार ने बिना सोचे समझे इसे मंजूरी दे दी है, ये खतरनाक हो सकता है : शशि थरूर, कांग्रेस पार्टी

• हम तो यह वैक्सीन नहीं लगवाएंगे क्योंकि यह बीजेपी की वैक्सीन है। इस वैक्सीन पर भरोसा नहीं : अखिलेश यादव, समाजवादी पार्टी

• दुनियाभर के कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष वैक्सीन लगवा रहे हैं, भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ये वैक्सीन क्यों नहीं लगवा रहे हैं, वे कब लगवायेंगे : रणदीप सिंह सुरजेवाला, कांग्रेस पार्टी

• प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं को सबसे पहले वैक्सीन लगवानी चाहिए : अजीत शर्मा, कांग्रेस पार्टी

कुल मिलाकर देखा जाए तो तीसरे चरण के परिणाम ने सभी विपक्षी नेताओं के मुंह बंद कर दिए हैं। भारत बायोटेक ने कहा है, “नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी से विश्लेषण से संकेत मिलता है कि वैक्सीन-प्रेरित एंटीबॉडी यूके के वेरियंट और अन्य वेरियंट को भी बेअसर कर सकता है।”

कंपनी ने कहा है कि तीसरे चरण के ट्रायल में 18 से 98 वर्ष की आयु के 25,800 लोगों को शामिल किया गया था। इनमें से 2,433 लोग 60 वर्ष से अधिक आयु के थे और 4,500 कॉमरेडिटीज (गंभीर बीमारी के लक्षण वाले लोग) थे। भारत बायोटेक के अनुसार यह भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के सहयोग से भारत में अब तक का सबसे बड़ा क्लिनिकल ट्रायल था।

भारत बायोटेक के चेयरमैन और एमडी डॉ. कृष्णा इल्ला ने कहा है कि कोवैक्सीन विकास, विज्ञान और कोरोना महामारी के खिलाफ जंग में अहम है। कोवैक्सीन कोरोना के खिलाफ प्रभावी सुरक्षा प्रदान करने के साथ ही यह नए स्ट्रेन को रोकने में भी पूरी तरह सक्षम है।

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