शिक्षा केवल डिग्री नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी है: डॉ. जोरा सिंह

दीक्षांत समारोह में प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग के 122 स्टूडैंट्स को दी गई डिग्री

CHANDIGARH, 17 MAY: गांधी स्मारक प्राकृतिक चिकित्सा समिति नई दिल्ली, नेचुरोपैथी योग आयुर्वेद साइंसेज समिति मोहाली तथा वरदान नेचुरोपैथी एवं योग इंस्टीट्यूट चंडीगढ़ के तत्वावधान में श्री माता मनसा देवी चैरिटेबल ट्रस्ट पंचकूला के ऑडिटोरियम में आज दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान समारोह के मुख्य अतिथि देश भगत यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति डॉक्टर जोरा सिंह ने 122 छात्र-छात्राओं को डिग्री प्रदान की।

इस अवसर पर कुलाधिपति डॉक्टर जोरा सिंह ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि शिक्षा केवल डिग्री नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का अहसास है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक चिकित्सा स्वस्थ जीवन बिताने की कला एवं विज्ञान है। यह ठोस सिद्धांतों पर आधारित एक औषधि रहित रोग निवारण पद्धति है। इस पद्धति को सब लोगों को सीखना चाहिए, ताकि स्वस्थ रह सकें। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक चिकित्सा समिति बहुत अच्छा काम कर रही है। इस कोर्स के लिए हम अपने विश्वविद्यालय से भी इस संस्था को जोड़ेंगे, ताकि छात्राओं को और अधिक लाभ मिल सके। उनको प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग में विश्वविद्यालय की डिग्री मिल सके। समिति की ओर से प्रथम आने पर छात्रा डॉ. रचना सिंह को स्वर्ण पदक एवं विशेष सम्मान तथा द्वितीय रहे छात्र दीपक क्षेत्रपाल को रजत पदक एवं सम्मान से नवाजा गया।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए डॉक्टर पुनीत मलिक ने युवाओं से देश के स्वास्थ्य निर्माण में भागीदारी निभाने की अपील की और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। मुख्य वक्ता डॉ. हरीश यादव संचालक आरोग्य अमृत नेचुरोपैथी योग अस्पताल एवं ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट हिसार ने ‘स्वस्थ जीवन शैली ‘ पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि प्राकृतिक चिकित्सा व्यक्ति को उसके शारीरिक, मानसिक, नैतिक तथा आध्यात्मिक स्थलों पर प्रकृति के रचनात्मक सिद्धांतों के अनुकूल निर्मित करने की एक पद्धति है। इसमें स्वास्थ्य संवर्धन, रोगों से बचाव, रोग निवारण और पुनर्निर्माण करने की अपूर्व क्षमता है। सभी रोग, उनके कारण एवं उनकी चिकित्सा एक है। यह प्राकृतिक चिकित्सा का मूल सिद्धांत है। प्राकृतिक चिकित्सा में रोग निदान सरलता से संभव है। जीर्ण रोगों से ग्रस्त रोगियों का भी प्राकृतिक चिकित्सा में सफलतापूर्वक इलाज होता है। प्राकृतिक चिकित्सा में औषधि का प्रयोग नहीं होता, प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार आहार ही औषधि है। प्राकृतिक चिकित्सा द्वारा शारीरिक, मानसिक, सामाजिक तथा आध्यात्मिक चारों पक्षों की चिकित्सा एक साथ की जाती है। इसलिए इसे अपनाना चाहिए।

इस अवसर पर प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग में विशेष कार्य कर रहे 6 व्यक्तियों को संस्थान की ओर से सम्मानित किया गया, जिनमें डॉक्टर आदित्य भारद्वाज, डॉक्टर हरिचंद गुप्ता, डॉ. मुकेश कुमार अग्रवाल, डॉ. जसमीत सिंह बेदी, प्रीति गोयल एवं डॉ. सुमन बाला शामिल रहे। इस मौके पर डॉक्टर संतोष गर्ग, सपना सोवत, उर्मिला देवी, अवतार सिंह, मीना कुमारी, नीलम गोयल, प्रवेश कुमार, शिखा ठाकुर, सलोनी, बृजेश सोलंकी, बलविंदर पाल सिंह, अमृता सिंह कौर, दीक्षा, विक्की, रमा, किरण, हेमराज, डॉ. रचना सिंह, रेनू त्रिखा , सतवीर सिंह, विवेक, योगी किशोर ठाकुर, दीपक, प्रदीप कुमार अग्निहोत्री, संजीव दिलावरी, मीना कुमारी, देवराज त्यागी समेत चंडीगढ़ ट्राइसिटी के अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

error: Content can\\\'t be selected!!