संवाद साहित्य मंच और आचार्य कुल संस्था चंडीगढ़ की ओर से कम्युनिटी सेंटर सेक्टर-43 के सभागार में किया गया चर्चा व काव्य गोष्ठी का आयोजन
CHANDIGARH, 29 JUNE: संवाद साहित्य मंच और आचार्य कुल संस्था चंडीगढ़ की ओर से आज कम्युनिटी सेंटर सेक्टर-43 के सभागार में प्रसिद्ध लेखिका और कवियत्री डॉ. प्रज्ञा शारदा के काव्य संग्रह ‘खामोशियां’ का विमोचन, चर्चा और काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि साहित्यकार और आकाशवाणी जालंधर के प्रोग्राम एग्जिक्विटिव सोहन कुमार थे, जबकि विशिष्ठ अतिथि के तौर पर पार्षद प्रेमलता और प्रसिद्ध कवि दीपक चनारथल मौजूद रहे। काव्य संग्रह ‘खामोशियां’ पर प्रपत्र वरिष्ठ साहित्यकार प्रेम विज, अशोक नादिर, डॉ. विनोद शर्मा, डॉ. अनीश गर्ग और अन्नु रानी शर्मा ने प्रस्तुत किया ।कार्यक्रम का संचालन डॉ. संगीता शर्मा कुंद्रा ‘गीत’ ने किया और सरस्वती वंदना पल्लवी रामपाल ने की। कार्यक्रम के आरंभ में आचार्य कुल संस्था चंडीगढ़ के अध्यक्ष के. के. शारदा ने सबका स्वागत किया और धन्यवाद पार्षद प्रेमलता ने किया। तत्पश्चात काव्य संग्रह की लेखिका डॉक्टर प्रज्ञा शारदा ने अपनी रचना प्रक्रिया की जानकारी देते हुए अपनी कुछ रचनाओं की प्रस्तुति दी।

काव्य संग्रह ‘खामोशियां’ पर प्रपत्र पढ़ते हुए वरिष्ठ साहित्यकार प्रेम विज ने कहा कि ‘खामोशियांं’ काव्य संग्रह में खामोशियांं बहुत कुछ कह जाती हैं, उसे समझने वाला चाहिए। कवियत्री डॉ. प्रज्ञा शारदा ने आम आदमी की वेदना, संघर्ष और द्वंद्व को अपनी कविताओं में पेश किया है। कविवर डॉ. विनोद शर्मा ने कहा कि इस काव्य संग्रह में समाज और परिवार के सभी पक्ष मौजूद हैं। कवियत्री डॉ. प्रज्ञा शारदा ने खुली आंंख से रिश्ते, संबंधों को देखा और उन्हें कविताओं में प्रस्तुत किया। शायर अशोक नादिर ने कहा कि डॉ. प्रज्ञा शारदा की कविताएं समाज और परिवार के इर्द-गिर्द घूमती हैं। कवियत्री डॉ. प्रज्ञा शारदा ने इन सभी को खुली आंख से देखा और इन्हें कविताओं में प्रस्तुत किया। कविवर डॉ. अनीश गर्ग ने कहा कि डॉ. प्रज्ञा शारदा की कविताओं में दैनिक जीवन से प्रसंग लिए गए हैं, जो की बहुत प्रभावशाली हैं। अन्नु रानी शर्मा ने कहा कि कवियत्री डॉ. प्रज्ञा शारदा का एक लंबा अनुभव इन कविताओं में देखने को मिलता है। उन्होंने जीवन में और अपने परिवार में जो कुछ भी देखा, उसे कविताओं में प्रस्तुत किया है। ऑल इंडिया रेडियो की उदघोषक मोनिका मेहता ने भी काव्य संग्रह ‘खामोशियां’ पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
इस अवसर पर चंडीगढ़ ट्राइसिटी के हिंदी ,पंजाबी और उर्दू के लगभग 55 कवि उपस्थित रहे। इस दौरान सुरजीत सिंह धीर ने डॉ. प्रज्ञा शारदा की कविता ‘खामोशी’ तरन्नुम में प्रस्तुत की। इनके अलावा किशोर कुमार, वीणा ढींगरा, राज विज, पल्लवी रामपाल, एम.एल. अरोड़ा, गुरदर्शन सिंह मावी, कृष्णा गोयल, आर.के. भगत, मंजू चौहान, लाजपत राय गर्ग, संतोष गर्ग, नीरू मित्तल, डेजी बेदी, ब्रजभूषण शर्मा, अनिल चिंतक, विंदर माझी, अनीता गगरेजा, सतवंत कौर गिल, पाल अजनबी, एम.एल. अरोड़ा, तेजेंद्र ठाकुर, एम.एम. जुनेजा, राजेंद्र सिंह, नितिन रामपाल, अन्नु शर्मा, करिश्मा वर्मा, पूनम, शिक्षित, गुरमीत कौर, मनजीत कौर आदि उपस्थित रहे।

