PU में ‘डॉ. भीमराव अंबेडकर: साहित्य, संविधान और समाज का पुनर्पाठ’ विषय पर हुई राष्ट्रीय संगोष्ठी

हिंदी विभाग ने किया आयोजन, डॉ. सुपिंदर कौर, प्रो. नवजोत, डॉ. कामराज सिंधु, जेबी सैनी, जय प्रकाश और हरप्रीत सिंह का विशेष सम्मान किया गया, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने विभिन्न शोध-पत्र प्रस्तुत किए

CHANDIGARH, 17 APRIL (ANewsoffice): पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के हिंदी विभाग ने ‘डॉ. भीमराव अंबेडकर: साहित्य, संविधान और समाज का पुनर्पाठ’ विषय पर आज एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन गोल्डन जुबली हॉल में किया। उदघाटन सत्र में संगोष्ठी के संयोजक प्रो. अशोक कुमार ने स्वागत भाषण देते हुए विषय की समकालीन प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रो. रेनु विग ने उदघाटन भाषण में आज के सामाजिक-सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य में डॉ. अंबेडकर के विचारों की महत्ता को रेखांकित किया।

मुख्य वक्ता प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने डॉ. अंबेडकर के साहित्यिक और वैचारिक योगदान का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया। मुख्य अतिथि प्रो. देविंदर सिंह तथा विशिष्ट अतिथि देवेंद्र सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए। अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रो. अशोक कुमार ने किया। इसके उपरांत आयोजित तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉ. रोशन लाल दहिया ने की। इस सत्र में डॉ. मनमोहन सिंह, पार्थ पोलके, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. नरेंद्र कुमार तथा सुश्री कनु शर्मा ने विशिष्ट वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त किए। साथ ही शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों द्वारा विभिन्न शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए, जिनमें डॉ. अंबेडकर के साहित्य, संविधान और सामाजिक दृष्टि के विविध आयामों पर गंभीर विमर्श हुआ। इस अवसर पर डॉ. सुपिंदर कौर एवं प्रो. नवजोत का विशेष सम्मान किया गया।

समापन सत्र की अध्यक्षता डॉ. संतोष कुमारी शर्मा ने की। इस सत्र में प्रो. रतन सिंह, प्रो. अजय रंगा, प्रो. प्रमोद मेहरा और विनीत जाखड़ विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने अपने विचारों के माध्यम से संगोष्ठी को सारगर्भित बनाया। समापन भाषण में प्रो. अशोक कुमार ने पूरे कार्यक्रम का संक्षिप्त प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए सभी प्रतिभागियों और अतिथियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर डॉ. कामराज सिंधु, जेबी सैनी, जय प्रकाश एवं हरप्रीत सिंह को विशेष सम्मान से अलंकृत किया गया। इस संगोष्ठी ने डॉ. अंबेडकर के विचारों के बहुआयामी पुनर्पाठ के साथ-साथ समकालीन समाज में उनकी प्रासंगिकता को नए दृष्टिकोण से समझने का अवसर प्रदान किया। कार्यक्रम का संचालन एवं आयोजन हिंदी विभाग की टीम ने किया।

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