चेतावनी दी: चंडीगढ़ पर निजीकरण जबरन थोपा गया तो शहर की सभी कालोनियों के लोग सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे
CHANDIGARH, 13 DECEMBER: चंडीगढ़ की पूर्व मेयर कमलेश बनारसीदास ने बिजली विभाग के निजीकरण का विरोध करते हुए निजीकरण को आम जनता की जेबें लूटने की भाजपा सरकार की साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि ये बात चंडीगढ़ का हर आम व्यक्ति भलीभांति समझ रहा है कि लाभ में चल रहे और व्यवस्थित तरीके से बिजली आपूर्ति कर रहे चंडीगढ़ के बिजली विभाग को केंद्र की भाजपा सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन प्राइवेट कंपनी को सौंपने किए क्यों आमादा हैं।
पूर्व मेयर कमलेश बनारसीदास ने कहा कि आज बेतहाशा महंगाई के दौर में तो आम आदमी का गुजारा करना मुश्किल होता जा रहा है। गरीब लोगों की इतनी आमदनी नहीं, जितनी महंगाई हो गई है। आज प्राइवेट सेक्टर में काम करने वालों की तनख्वाह 10 से 15 हजार रुपए महीने है, ऊपर से बिजली का बिल अभी भी 4000 हजार रुपए से कम नहीं आता। पानी का बिल भी लगभग 2000 रुपए आता है। सब्जी कोई भी 50 रुपए किलो से कम नहीं है और बच्चों की पढ़ाई भी बेहद महंगी हो चली है। इस सबसे ही आम घर का बजट आउट ऑफ कंट्रोल हो रहा है। ऐसे में अब बिजली प्राइवेट करने से आम लोगों पर आर्थिक बोझ और ज्यादा बढ़ जाएगा, क्योंकि प्राइवेट कंपनी बिजली की दरें निश्चित तौर पर बढ़ाएगी।
कमलेश बनारसीदास ने चंडीगढ़ प्रशासन से सवाल किया है कि चंडीगढ़ में बिजली विभाग का निजीकरण करने की आवश्यकता ही क्या है, क्या प्रशासन खुद बिजली विभाग चलाने में असमर्थ है, जबकि कर्मचारी और अधिकारी भी पर्याप्त हैं। क्या प्राइवेट कंपनी के पास प्रशासन से ज्यादा संसाधन हैं।
क्या प्राइवेट कंपनी सस्ती बिजली देगी ? कमलेश बनारसीदास ने चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया से आग्रह किया है कि वह इस तरह का कोई भी कदम उठाने से पहले उससे प्रभावित होने वाले सभी पक्षों की राय लें और उनकी सहमति के बिना कोई भी अंतिम निर्णय न लें। पूर्व मेयर कमलेश बनारसीदास ने चेतावनी दी कि यदि चंडीगढ़ की आम जनता पर बिजली विभाग का निजीकरण जबरन थोपा गया तो शहर की सभी कालोनियों के गरीब और अन्य आम लोग सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे।

