कहा-यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता का नहीं, बल्कि जनता के पैसे की सुनियोजित लूट का गंभीर मामला है। पुराने सभी घपलों की जांच रिपोर्टें भी लोगों के सामने लाई जाएं
CHANDIGARH, 12 MARCH (ANewsoffice): पुलिस में शिकायत जाने के बाद सामने आए चंडीगढ़ नगर निगम के 116.84 करोड़ रुपए के कथित ‘घोस्ट’ फिक्स्ड डिपॉजिट घपले को लेकर अब पार्षद भी नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं। वार्ड नंबर-23 की पार्षद प्रेमलता ने कहा है कि नगर निगम में विपक्ष की सतर्कता से मनीमाजरा की बेशकीमती जमीन कौड़ियों के भाव लुटने से बच गई लेकिन बैंक में रखा जनता का पैसा किन अफसरों की मिलीभगत और लापरवाही से लुटा, इसकी तत्काल सीबीआई जांच करवाई जाए।
प्रेमलता ने कहा कि कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक मनीमाजरा की नगर निगम जमीन को आनन-फानन बेचने की कोशिश में जिस बिल्डर का नाम उछल रहा था, वही नाम अब 116.84 करोड़ रुपए के इस घोटाले में भी जुड़ता दिख रहा है। प्रेमलता ने सवाल उठाया कि क्या यह महज संयोग है या नगर निगम को लूटने की कोई बड़ी साजिश चल रही थी ? उन्होंने कहा कि सवाल तो ये भी उठता है कि इतनी बड़ी राशि को प्राइवेट बैंक में ट्रांसफर करने की अनुमति किस अधिकारी ने दी, क्या पुराने बैंक खातों को सुरक्षित नहीं माना गया, क्या हेड ऑफ डिपार्टमेंट से पूर्व अनुमति ली गई थी या यह सब पोस्ट-फैक्टो मंजूरी का मामला है, -सरकारी नियमों और ऑफिस प्रक्रिया मैनुअल (OPM) की स्पष्ट अनदेखी कैसे हुई ?
पार्षद प्रेमलता ने कहा कि और भी चौंकाने वाली बात यह है कि 2025 के मेयर चुनाव के बाद जब नगर निगम कर्मचारियों की तनख्वाह के लिए रिटायर्ड कर्मचारियों के पेंशन हेड से 60 करोड़ रुपए एडवांस ले रहा था, उसी समय यह 116.84 करोड़ रुपए का फर्जी FDR का खेल चल रहा था। सीधा सवाल है कि यदि निगम के पास इतनी बड़ी राशि उपलब्ध थी तो पेंशन फंड से अतिरिक्त पैसे क्यों लिए गए ?
प्रेमलता ने कहा कि यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता का नहीं है, बल्कि जनता के पैसे की सुनियोजित लूट का गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि पहले भी चंडीगढ़ में कई घोटाले सामने आए हैं जैसे, मनीमाजरा में नगर निगम की जमीन को औने-पौने दामों में बेचने की कोशिश, डडडूमाजरा गार्बेज प्रोसेसिंग प्लांट और हॉर्टिकल्चर वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट में गड़बड़ियां, 24×7 वाटर सप्लाई घोटाले की लंबित रिपोर्ट, -इन्फोर्समेंट स्टाफ में आउटसोर्स कर्मचारियों द्वारा कथित भ्रष्टाचार, पेड पार्किंग घोटाला। प्रेमलता ने कहा कि इन सभी मामलों की जांच रिपोर्टें जनता के सामने लाई जानी चाहिए।
इसके अलावा 116.84 करोड़ रुपए के नए घोटाले सहित सभी संबंधित अनियमितताओं की तत्काल, तेज और पारदर्शी जांच हो। प्राथमिक जांच के बाद मामला CBI को सौंपा जाए, ताकि निष्पक्ष जांच बिना किसी दबाव के हो सके। दोषी अधिकारियों, बैंक कर्मचारियों और अन्य संलिप्त व्यक्तियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो। सार्वजनिक धन की सुरक्षा के लिए मजबूत सिस्टम और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

