प्राचीन कला केंद्र में जुटे शहर के युवा कवियों ने कविताओं के माध्यम से जताया पाकिस्तान के प्रति आक्रोश
CHANDIGARH, 11 MAY: प्राचीन कला केंद्र सेक्टर-35 चंडीगढ़ में आज शहर के युवा कवियों ने एकत्रित होकर अपनी कविताओं के माध्यम से पाकिस्तान के प्रति आक्रोश व्यक्त किया। इस दौरान अपनी आदत से मजबूर पाकिस्तान द्वारा सीज फायर तोड़ने पर कवि डा. अनीश गर्ग ने प्रहार करते हुए अपनी रचना में कहा,
उन पर यकीं कैसे किया,
जिनकी फितरत में फरेब है।
लोगे तलाशी तो पाओगे,
उनके कफन में भी जेब है।
इधर प्राण जाए, वचन न जाए,
उधर खून में औरंगजेब है।।
डा. मंजू चौहान ने युद्ध विराम की इच्छा व्यक्त करते हुए कहा,
यह क्या झगड़े यह क्या बातें,
क्या चर्चा है गलियारों में,
कोई खबर बाहर ना जा पाए,
निबटा लो झगड़ा यारों में ।
युवा कवि हनी खेड़ा ने कहा,
जन्नत जिहे कश्मीर नू नर्क बना छडिआ,
क्यों अल्लाह वाले राम दे दुश्मन बन बैठे।
डेजी बेदी ने युद्ध के डर को व्यक्त करते हुए कहा,
देखी हवा ने मौत बनते जिंदगी को,
खुशबू फ़िज़ा में इतरा रही थी, पल में देखा बेबसी को।
सुधा मेहता ने कहा,
ऑपरेशन सिंदूर बन गया मां भारती के आंचल की रखवाली,
शौर्य से सजा दी देखो बलिदानों की थाली।
शायर भट्टी ने मातृ दिवस पर अपनी रचना की पंक्तियां पढ़ते हुए कहा,
मां बिन घर, घर नहीं होता,
मां घर में हो तो कोई डर नहीं होता।
राजन सुदामा ने मां पर गजल पढ़ी,
जो मां के हाथ मे अपनी कमाई देते हैं,
दुखों को घर से वो अपने विदाई देते हैं।
अनीता गरेजा ने मां पर कविता प्रस्तुत करते हुए कहा,
माँ वो धूप है जो साया बन जाती है,
अपने आांचल में हर दर्द छुपा जाती है।
बेअंत कौर ने कहा,
वतन की खुशबू सांसों में बसाई है,
कुछ यूं देह की मिट्टी महकाई है।
भूपिंदर भूप्पी ने कहा,
वतन के काम ना आया तो यह शरीर किस काम का,
देखिए हर युवा बन गया हनुमान श्रीराम का।
मनु शतरानवी ने कहा,
ना गीता दी ना कुरान दी,
गल्ल कर कोई अमान दी।
कवि एसएस सिद्धू ने कहा,
आओ खत्म करें दीवारें नफरतों की,
चर्चा करें अमन-शांति की बरकत की।

