UVM अध्यक्ष बोले-जब सरकार स्वयं देश में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देकर पारदर्शी और डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है तो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त MDR का भार डालना उचित नहीं, उनके सीमित व्यापारिक मार्जिन पर सीधा प्रभाव डाल सकता है MDR
CHANDIGARH, 16 SEPTEMBER (ANewsoffice): उद्योग व्यापार मंडल (UVM) चंडीगढ़ के अध्यक्ष कैलाश चंद जैन ने केंद्र सरकार से मांग की है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की नीति के अनुरूप UPI के माध्यम से होने वाले व्यापारिक लेन-देन तथा वस्तुओं की खरीद-बिक्री के भुगतान पर MDR समाप्त किया जाए। जैन ने कहा कि नकद लेन-देन और डिजिटल व्यापारिक लेन-देन की प्रकृति अलग है। इसलिए दोनों को एक ही दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए।
नकद लेन-देन में ग्राहक सीधे व्यापारी को राशि का भुगतान करता है, जबकि व्यापारिक डिजिटल भुगतान बैंकिंग व्यवस्था और UPI जैसी डिजिटल भुगतान प्रणालियों के माध्यम से होता है। उन्होंने कहा कि जब सरकार स्वयं देश में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देकर पारदर्शी और डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है तो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त MDR का भार डालना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि वस्तुओं की सामान्य खरीद-बिक्री, खुदरा व्यापार और छोटे दुकानदारों द्वारा स्वीकार किए जाने वाले UPI भुगतान को विशेष रूप से Zero-MDR के दायरे में रखा जाना चाहिए।
इससे छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक भार नहीं पड़ेगा और ग्राहक भी डिजिटल भुगतान को अधिक सहजता से अपनाएंगे। कैलाश चंद जैन ने कहा कि सरकार को नकद और डिजिटल व्यापारिक लेन-देन के बीच स्पष्ट अंतर को ध्यान में रखते हुए नीति बनानी चाहिए। यदि देश को Digital India की दिशा में आगे बढ़ाना है तो डिजिटल भुगतान को सरल, सुविधाजनक और बिना अतिरिक्त लागत वाला बनाना आवश्यक है। छोटे दुकानदारों से UPI भुगतान स्वीकार करने के लिए अतिरिक्त शुल्क लेना उनके सीमित व्यापारिक मार्जिन पर सीधा प्रभाव डाल सकता है। उन्होंने कहा कि नकद लेन-देन और डिजिटल भुगतान की प्रक्रिया एवं लागत अलग-अलग होती है। इसलिए भुगतान संबंधी नीतियां बनाते समय दोनों व्यवस्थाओं की प्रकृति और उनके आर्थिक प्रभाव को अलग-अलग ध्यान में रखा जाना चाहिए। उद्योग व्यापार मंडल चंडीगढ़ ने मांग की कि छोटे एवं मध्यम व्यापारियों के सामान्य UPI लेन-देन को Zero-MDR के दायरे में रखा जाए तथा भुगतान संबंधी किसी भी नई शुल्क व्यवस्था अथवा परिवर्तन से पहले व्यापारिक संगठनों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया जाए।

