कहा- जोशी यदि वास्तव में निगम कर्मचारियों का हित चाहते हैं तो फंड की कमी बताकर निकाले गए सभी कर्मचारियों की नौकरी बहाल करें, वरना स्टाफ की कमी का मुद्दा उठाना केवल जनता को गुमराह करने का प्रयास और BJP की गरीब व आम जनता विरोधी सोच को करता है उजागर
CHANDIGARH, 27 MARCH (ANewsoffice): वार्ड नंबर-23 की पार्षद श्रीमती प्रेमलता ने मेयर सौरभ जोशी द्वारा चंडीगढ़ के प्रशासक को नगर निगम में स्टाफ की कमी पर लिखे गए पत्र को बीजेपी के जनता के प्रति दोहरे चेहरे और भ्रामक चरित्र का उदाहरण बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है।
पार्षद प्रेमलता ने कहा कि कुछ महीने पहले बीजेपी की पूर्व मेयर के कार्यकाल में नगर निगम के हजारों कर्मचारियों को बिना किसी नोटिस के नौकरी से निकाल दिया गया था। आज भी वे कर्मचारी अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए सड़कों पर भटक रहे हैं और वैकल्पिक रोजगार की तलाश कर रहे हैं। इसके विपरीत नगर निगम में पैसा होते हुए भी उस समय पैसे की कमी का शोर मचाकर इन कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया था, जबकि उसी समय निगम के सैकड़ों करोड़ रुपए का घोटाला कुछ कर्मचारियों द्वारा तत्कालीन भाजपा मेयर की नाक के नीचे बैंकों के साथ मिलकर किया जा रहा था।
प्रेमलता ने मौजूदा मेयर मेयर सौरभ जोशी से मांग करते हुए कहा है कि यदि वह वास्तव में नगर निगम कर्मचारियों का हित चाहते हैं तो फंड की कमी बताकर निकाले गए सभी कर्मचारियों की नौकरियां बहाल करें, ताकि उनके घरों में चूल्हा जल सके, बीमार माता-पिता को दवाइयां मिल सकें और उनके बच्चों की पढ़ाई ठीक से चल सके।
पार्षद प्रेमलता ने कहा कि नए मेयर के चुनाव के बाद एक एसडीओ का तबादला नगर निगम से प्रशासन में कर दिया गया है। प्रेमलता ने मेयर सौरभ जोशी से सवाल किया है कि क्या यह उनके अनुमोदन से हुआ ? यदि नहीं तो उन्होंने इसके विरुद्ध अभी तक आवाज क्यों नहीं उठाई ? प्रेमलता ने कहा कि मेयर सौरभ जोशी एक तरफ नगर निगम में स्टाफ की कमी का राग अलाप रहे हैं, दूसरी तरफ अपने ही स्टाफ को प्रशासन में भेज रहे हैं। यह स्पष्ट रूप से मेयर सौरभ जोशी और बीजेपी के दोहरे मापदंड को उजागर करता है। पार्षद प्रेमलता ने जोर देकर कहा कि यदि मेयर सौरभ जोशी पूर्व भाजपा मेयर के कार्यकाल में निकाले गए कर्मचारियों को दोबारा नौकरी पर नहीं बहाल करते तो स्टाफ की कमी का मुद्दा उठाना केवल जनता को गुमराह करने का प्रयास है और बीजेपी की गरीब तथा आम जनता विरोधी सोच को उजागर करता है।

