व्यंग्य: मैं आम आदमी हूं…
मैं आम आदमी हूं। कभी किसी की टोपी पर चिपका नजर आता हूं तो कभी आरके लक्ष्मण के कार्टूनों में दिखता हूं। या फिर ‘वाग्ले की दुनियाÓ का हिस्सा बन जाता हूं। कभी-कभी मुसद्दी लाल की तरह आफिस-आफिस भटकता हूं। मुझे ही मुद्दा बनाकर लोग लोकसभा पहुंचते हैं। मजबूत कुर्सियों पर परलोक सभा जाने तक […]
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